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महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की जीवनी | Aryabhatta Biography In Hindi

Aryabhatta Biography In Hindi

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की जीवनी | Aryabhatta Biography In Hindi

Aryabhatta Biography In Hindi – आर्यभट्ट भारत के महान गणितज्ञ, ज्योतिषविद और खगोलशास्त्री थे, पुराने समय के महान भारतीय विद्वानों में आर्यभट्ट का भी नाम शामिल है, अगर हम पुराने समय के प्रमुख विद्वानों के नाम ले तो कुछ इस तरह है जैसे :- वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य और कमलाकर आदि.

आर्यभट्ट भारत के महान खगोलीय और गणितज्ञ थे, जिन्होंने अपनी खगोलीय खोजो के बाद सार्वजानिक घोषणा की कि पृथ्वी 365 दिन 6 घंटे और 12 मिनट और 30 सेकंड में सूर्य का एक चक्कर लगाती है जिसके चलते देश भर में इनकी सराहना हुई और प्रोत्साहन मिला.

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की जीवनी | Aryabhatta Biography In Hindi

आर्यभट्ट के जन्म के बारे में कोई भी पुख्ता प्रमाण तो नही है पर ऐसा कहा जाता है की गौतम बुद्ध के समय अश्मक देश के कुछ लोग मध्य भारत में नर्मदा और गोदावरी नदियों के बीच आकर बस गये थे तो ऐसा कहा जाता है की आर्यभट्ट का जन्म भी यही पर 476 ईसा पूर्व हुआ था. तथा एक अन्य प्रमाण के अनुसार आर्यभट्ट जा जन्म 476 ईसापूर्व कुसुमपुर (पटना, बिहार) में हुआ था.

आर्यभट्ट की शिक्षा

आर्यभट्ट की शिक्षा को लेकर इतिहासकारों के पास कोई ठोस जानकारी नही मिलती है, लेकिन इस बात का प्रमाण जरुर है की अपने जीवन में किसी उच्च शिक्षा को प्राप्त करने के लिये कुसुमपुर गये थे क्योकि कुसुमपुर में उच्च शिक्षा हेतु एक प्रसिद्ध विद्यालय था.

आर्यभट्ट के कार्य एवं रचनाएँ

आर्यभट्ट ने गणित एवं खगोलशास्त्र पर अनेक रचनाएँ की है जिनमे से बहुत सी रचनाएँ तो विलुप्त हो चुकी है पर कुछ ऐसी भी रचनाएँ है जिन्हें आज भी प्रयोग में लाया जाता है.

आर्यभटीय

मात्र 23 वर्ष की उम्र में आर्यभट्ट ने आर्यभटीय ग्रन्थ की रचना की थी जो की एक विलक्षण ग्रन्थ है और संस्कृत में लिखा गया है. इस ग्रन्थ में कुल 108 श्लोक है, जिनमे अंकगणित, बीजगणित और त्रिकोणमिति का वर्णन किया गया है.

साथ ही इसमें आपको सतत भिन्न [Continued Fractions], द्विघात समीकरण [Quadratic Equation], ज्याओ की तालिका [Table of Sines] और घात श्रंखलाओ का योग [Sums of Power Series] का भी वर्णन किया गया है.

आर्य – सिद्धांत

आर्यभट्ट की यह रचना पूर्ण रूप से उपलब्ध तो नही है पर जितना भी इस पुस्तक का भाग उपलब्ध है उसमे तरह तरह से खगोलीय उपकरणों का वर्णन किया गया है, जैसे :- शंकु यंत्र [Gnomon], छाया यंत्र [Shadow Instrument], बेलनाकार यस्ती यंत्र [Cylindrical Stick], कोण मापी यंत्र [Angle Measuring Device], जल घडी [Water Clock], धनुर यंत्र या चक्र यंत्र [Semi Circular or Circular Instrument] आदि.

इस रचना में सूर्य सिद्धांत का प्रयोग किया गया है, जिसमे सूर्योदय की उपेक्षा की जाती है और इसमें अर्धरात्रि गणना का भी उपयोग किया जाता है.

आर्यभट्ट के योगदान

आर्यभट्ट ने गणित और खगोलशास्त्र में अपने बहुत से महत्वपूर्ण योगदान दिए है जिनमे से कुछ इस प्रकार है:-

गणित में योगदान

पाई की खोज [history of pai in hindi]

आर्यभट्ट ने पाई के मान की खोज की इसका वर्णन उनकी रचना आर्यभटीय के गणितपद 10 में मिलता है, जो इस प्रकार है,

सौ में चार जोड़ें, फिर आठ से गुणा करें और फिर 62000 जोड़ें और फिर 20000 से भाग दे इससे प्राप्त भागफल पाई का मान होगा आप नीचे देखे,

[ ( 100 + 4 ) x 8 + 62000 ] / 20000 = 62832 / 20000 = 3.1416

शून्य की खोज [history of zero]

आर्यभट्ट ने अपने जीवन में बहुत सी महत्वपुर्ण खोजे की पर उनमे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है उनके द्वारा की गयी ‘शून्य’ की खोज, शून्य के आभाव में गणनाएं करना असंभव होता क्योकि किसी संख्या के आगे शून्य लगते ही उसका नाम 10 गुणा मान बढ़ जाता है, इन्होने ने ही सबसे पहले स्थानीय मानक पद्धति के बारे में जानकारी दी.

त्रिकोणमिति

आर्यभटीय के गणितपद 6 के अनुसार त्रिभुज में क्षेत्रफल के बारे में बताया है, आर्यभट्ट ने ज्या के सिद्धांत [Concept of sine] का वर्णन किया है, उन्होंने अर्द्ध – ज्या [Half – Chord] नाम दिया है परन्तु सरल लगने के लिये इसे ज्या कहते है.

बीजगणित

आर्यभट्ट ने आर्यभटीय में वर्गों एवं घनों [Squares & Cubes] की श्रंखला के जोड़ का भी उचित परिणाम का वर्णन किया है.

12 + 22 +……….+ n2 = [ n ( n+1 ) ( 2n + 1 ) ] / 6

&

13 + 23 +………+n3 = ( 1 + 2 +………+n )2

खगोलशास्त्र में योगदान

इनके खगोलशास्त्र में दिए गये सिद्धांतो को सामूहिक रूप से औद्याका सिस्टम कहते है, आर्यभट्ट के बाद की कुछ रचनाओ में पृथ्वी की परिक्रमा की बात कही गयी है पर आर्यभट्ट का यह भी मानना था की पृथ्वी गोलाकार न होकर दीर्घवृतीय है.

उदहारण हेतु जब हम किसी वाहन पर बैठ कर यात्रा करते है तो जब वह वाहन आगे बढ़ता है तो वाहन पर बैठे यात्री को आस पास की वस्तुए पीछे जाती हुए प्रतीत होती है पर ऐसा नही होता है, इसीप्रकार स्थिर पृथ्वी पर से स्थिर नक्षत्र भी विपरीत दिशा में जाते हुए दिखाई देते है हमें यह इसलिए लगता है क्योकि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है इसकी यह गति भ्रम उत्पन्न करती है.

इसके आलावा भी आर्यभट्ट ने खगोलशास्त्र में बहुत से योगदान दिए है जो की इस लेख में वर्णन कर पाना संभव नही है.

ज्योतिर्विद के रूप में योगदान

आर्यभट्ट ने लगभग डेढ़ हज़ार साल पहले ही ज्योतिष विज्ञान की खोज करली थी, जब इतने उन्नत साधन एवं उपकरण भी उपलब्ध नही थे.

आर्यभट्ट के बारे में रोचक तथ्य

  • इनके लोकप्रिय ग्रन्थ आर्यभटीय को आर्यभटीय नाम इनके 100 साल बाद भारतीय गणितज्ञ भास्कर ने दिया था.
  • आर्यभटीय ग्रन्थ में कुल 121 श्लोक है जो चार भागों में बाटे गये है, दशगीतिका, गणितपद, कालक्रिया, गोलपाद आदि.
  • आर्यभट्ट ने दशगीतिका भाग में पहले पांच ग्रहों की गणना एवं हिन्दू कालगणना और त्रिकोणमिति की चर्चा की है.
  • आर्यभट का मानना था की सूर्य सौर मंडल के केंद्र स्थित है, पृथ्वी सहित अन्य गृह सूर्य की परिक्रमा करते है.
  • हम सब जो त्रिकोणमिति पढ़ते है उसकी खोज आर्यभट्ट ने ही की थी.
  • आर्यभट्ट ने पाई के मान का पता लगाया.
  • आर्यभट्ट ने जीरो (शून्य) की खोज की.

तो दोस्तों ये था आर्यभट्ट का जीवन परिचय | Aryabhatta Biography In Hindi अगर आपको ये लेख पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर share करें और आप हमें सोशल मीडिया पर फॉलो भी कर सकते है.

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Rajaneesh Maurya

रजनीश मौर्या blog4help के डिजाईन, डेवेलपमेंट और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के विशेषज्ञ है, ये इस साईट के एडमिन भी है| इन्हें वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ करना और आर्टिकल लिखना बहुत ही पसंद है|

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