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कालिदास का जीवन परिचय | Kalidas Biography in Hindi

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कालिदास का जीवन परिचय | Kalidas Biography in Hindi : कालिदास के जन्म के बारे में मिले प्रमाणों के अनुसार पहली से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच माना जाता है, कालिदास संस्कृत के महान कवि और नाटककार थे, इनके जैसा कवि न आज तक हुआ है और शायद न ही होगा, कालिदास भगवान शिव के भक्त थे.

कालिदास के नाम अर्थ है – काली का सेवक, इन्होने भारत की पौराणिक कथाओ और दर्शन को आधार बनाकर अपनी रचनाये की, कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर और सरल मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते है उनकी रचनाओ में आपको लुभावनापन और प्रेम दिखेगा.

कालिदास का जीवन परिचय | Kalidas Biography in Hindi

पूरा नाम – महाकवि कालिदास

जन्म – 150 ईसा पूर्व

जन्मस्थान – उत्तर प्रदेश

पत्नी – विद्योतमा

कर्म क्षेत्र – संस्कृत कवि

उपाधि – महाकवि

कालिदास का जीवन परिचय ( Kalidas Biography in Hindi ): कालिदास के जीवन के सम्बन्ध में अनेक मत है पर जिसे सबसे ज्यादा प्राथमिकता दि जाती है उसके अनुसार कालिदास का जन्म 150 ईसा पूर्व में हुआ था तथा इसके जन्म स्थान को उत्तर प्रदेश माना जाता है.

ऐसा माना जाता है की कालिदास प्रारंभ में अशिक्षित थे और कुछ पंडितों ने जो की अत्यंत विदुषी राजकुमारी विद्योतमा से शास्त्रार्थ में पराजित हो चुके थे वो राजकुमारी से बदला लेने के लिये उनका विवाह कालिदास के साथ करा दिया था.

सच का पता चलने के बाद राजकुमारी को बहुत दुःख हुआ जिसके बाद कालिदास ने ज्ञान प्राप्त करने का संकल्प लिया और घर छोड़कर अध्ययन के लिये निकल गये और वापस विद्वान् बनकर ही घर आये.

कालिदास की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति जिसमे उन्हें सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मिली उसका नाम है “अभिज्ञानशाकुन्तलम” इस कृति का विश्व की अनेक भाषाओ में अनुवाद किया जा चुका है, तथा कालिदास जी का दूसरा नाटक “विक्रमोर्यवशियम्” तथा “मालविकाग्निमित्र” भी उत्कृष्ट नाट्य साहित्य में अपना बेहतरीन स्थान रखते है.

कालिदास जी के केवल दो ही महाकाव्य उपलब्ध है “रघुवंश” और “कुमारसंभव” पर ये दो ही महाकाव्य ही उनकी कीर्ति का झंडा फहराने के लिये पर्याप्त है, काव्यकला की दृष्टि से कलिदास जी की रचना “मेघदूत” सर्वोत्तम है.

मेघदूत में प्रयोग की गयी सरस भाषा में प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति की गयी है प्रकृति चित्रण से पाठक मुग्ध हो जाते है, मेघदूत का भी अनुवाद कई भषाओ में किया जा चुका है, उनका ऋतू संहार प्रत्येक ऋतु में प्रकृति के लिये ही लिखा गया है.

महाकवि कालिदास को भारत ही बल्कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ साहित्यकारों में स्थान दिया गया है, उन्होंने नाटक, महाकाव्य तथा गीतकाव्य के क्षेत्र में अपनी अद्भुत रचनाशक्ति का प्रदर्शन कर अपनी विशेष पहचान बनायीं है.

कालिदास जी की छोटी और बड़ी मिलकर लगभग 40 रचनाएँ है जिन्हें अलग अलग विद्वानों ने कालिदास द्वारा रचित सिद्ध करने का प्रयास किया है, इनमे से केवल 7 ही ऐसी रचनाये जो की बिना किसी विवाद के कालिदास की मानी जाती है.

जिसमे से तीन नाटक अभिज्ञानशाकुन्तलम, विक्रमोर्यवशियम्, तथा मालविकाग्निमित्र और दो महाकाव्य रघुवंशम और कुमारसंभवम तथा दो खंडकाव्य मेघदूतम् और ऋतुसंहार है, इनमे से ऋतुसंहार को प्रो. कीथ संदेह के साथ कालिदास की रचना स्वीकारते है.

कालिदास की रचनाएँ

जैसा की हमने आपको ऊपर बताया की केवल 7 ही ऐसे रचनाये है जिन्हें कालिदास द्वारा रचित माना जाता है तो अब हम उनके बारे में संक्षिप्त में जानेगे.

1 – अभिज्ञानशाकुन्तलम

इस नाटक में महाभारत के आदिपर्व के शाकुंतालोपख्यान का वर्णन किया गया है जिसमे रजा दुष्यंत और शकुन्तला की प्रेम कथा का वर्णन किया गया है, इस नाटक में कुल 7 अंक है ये ही वो रचना है जिसमे कालिदास को पूरे विश्व में प्रसिद्धि मिली और जब 1791 में इस नाटक का अनुवाद जर्मन में किया गया तो इसे पढने के बाद जर्मन विद्वान् गेटे इतने ज्यादा आनंदित हुए की उन्होंने इसकी प्रसंसा में एक कविता लिख डाली.

2 – विक्रमोर्यवशियम्

यह नाटक पूरी तरह से रोमांचक नाटक है जिसमे स्वर्ग में रहने वाले पुरुरुवा, स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी के प्यार में पड जाते है और उर्वशी भी उनसे प्यार करती है, और इसके बाद जब इंद्र की सभा में उर्वशी नृत्य करने के लिये जाती है.

तो वहा पर उनके दिमाग में पुरुरुवा के ही ख्वाब आते है जिसके चलते वो अच्छा प्रदर्शन नही कर पाती है जीके कारण इंद्र उन्हें श्राप देकर  धरती पर भेज देते है, और ये श्राप तभी टल सकता था जब उर्वशी की होने वाली सन्तान को पुरुरुवा देख ले तब वो वापस स्वर्ग जा सकती थी.

3 – मालविकाग्निमित्र

इस नाटक में राजा अग्निमित्र की कहानी है जिसमे वो घर से निकाले गये एक नौकर की बेटी मालविका के चित्र से प्यार करने लगते है, काफी मुसीबतों के बाद आखिर में अग्निमित्र और मालविका का मिलन हो जाता है.

4 – रघुवंशम

इस महाकाव्य में रघुकुल वंश का वर्णन किया गया है जिसमे भगवान राम का जन्म हुआ था, जिसमे बताया गया है की दिलीप रघुकुल वंश के प्रथम राजा थे, जिनमे दिलीप के पुत्र रघु और रघु के पुत्र अज और अज के पुत्र दशरथ थे और राजा दशरथ के भगवन राम समेत चार पुत्र थे.

5 – कुमारसंभवम

इस में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रेमकथा का वर्णन और उनके पुत्र कार्तिकेय के जन्म की कहानी है, कई विद्वानों का मानना है कि कालिदास की मूल रचना में केवल शिव और पार्वती की प्रेमकथा ही थी पर बाद में किसी और विद्वान् ने इसमें कार्तिकेय के जन्म का वर्णन किया है.

6 – मेघदूत

मेघदूत में एक वर्ष के लिये शहर से निकाले गये एक सेवक जिसका नाम यक्ष है, उसे अपनी पत्नी की याद सताती है और वो मेघ यानि बादलों से याचिका करता है की वो उसका सन्देश उसकी पत्नी तक ले जाएँ.

7 – ऋतुसंहार

इस खंडकाव्य को कुछ विद्वान् कालिदास की रचना नही मानते है पर इसमें राजा विक्रमादित्य का वर्णन किया गया है और साथ ही यह ऐसी पहली रचना है जिसमे भारत की सभी ऋतुओ का विस्तार से वर्णन किया गया है.

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Rajaneesh Maurya

रजनीश मौर्या blog4help के डिजाईन, डेवेलपमेंट और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के विशेषज्ञ है, ये इस साईट के एडमिन भी है| इन्हें वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ करना और आर्टिकल लिखना बहुत ही पसंद है|

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