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What is Reservation In Hindi – आरक्षण क्या है?

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What is Reservation In Hindi – आरक्षण क्या है: आरक्षण हमारे भारत देश की सबसे बड़ी त्रासदी यही है! जब कोई अयोग्य व्यक्ति किसी ऊँचे या नीचे पद पर पहुच जाता है तो उससे न ही देश का हित होता है और न ही समाज का हित होता है.

आरक्षण एक ऐसा शब्द है जो की आज हर किसी से सुनने को मिल जायेगा वैसे अब हम 21वीं सदी में जी रहे है पर फिर भी हमारे साथ एक ही लड़ाई है और वो है आरक्षण की.

ऐसा नही की आरक्षण नही मिलना चाहिए आरक्षण मिलना चाहिए पर उस व्यक्ति को जो आरक्षण के योग्य हो पर आज सच तो ये है उस व्यक्ति को आरक्षण नही मिलता जो उसके योग्य है पर उसे जरुर मिल जाता है जो उसके बिलकुल योग्य नही है.

आरक्षण का इतिहास (History of Reservation)

भारत एक विशाल जनसँख्या वाला देश है और यहाँ पर लगभग सभी जाति और धर्म के लोग रहते है, प्राचीन कल में हिंदुस्तान में एक समस्या थी की लोगो को चार भागो में बाँट दिया गया था जिसमे शामिल थे पुरोहित, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र.

जैसे जैसे हम आगे आते गये वैसे वैसे ये समस्या और विशाल रूप लेते गयी और अंत में लोगो को जाति और धर्म के अनुसार पहचाना जाने लगा और उसी के अनुसार उनका शोषण भी किया जाता है.

जो लोग उच्च कुल में जन्मे है वो निम्न कुल के लोगो से बहुत ही दूरी बना कर रखते है इतना ही नही उन्हें शिक्षा, नौकरी, व्यापार, मंदिरों आदि तक में वो अधिकार नही मिलता जो की उन्हें चाहिए, निम्न कुल के लोगो के हाथ का दिया गया पानी भी नही पीते है लोग जिसके चलते कुछ ऐसे नियम व कानून बनाये गये जिससे सभी का हित हो सके और उनका शोषण न होने पाये.

आरक्षण के लिये डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर ने महत्वपूर्ण कदम उठाये थे जिसका लाभ आज हम सभी को मिल रहा है.

What is Reservation In Hindi – आरक्षण क्या है?

आरक्षण अपने ही अधिकारों की ऐसी लड़ाई थी जिसके लिये आवाज़ उठाना आज से कुछ वर्षो पहले बहुत जरुरी हो गया था अगर ऐसा न हुआ होता तो आज जो हम समाज को कुछ समानता देखते है ये शायद ही देखने को मिलती.

प्राचीन काल से ही हमारा समाज चार वर्गों में बटा है जिसमे पुरोहित, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र शामिल थे जिसमे से शूद्र वर्ग की महिलाओ की सुरक्षा को देखते हुए और इसके साथ और भी बहुत से कारण थे जिसकी वजह से कुछ लोग बहुत पीछे होते जा रहे थे, जब आरक्षण लागु हुआ तो ये उन पीछे जाते लोगो के लिये एक तरह का सुरक्षाकवच बना.

आरक्षण को कम शब्दों में कहे तो आरक्षण एक तरह का विशेष अधिकार है उन लोगो के लिये जिनका शोषण हो रहा था, तब सभी को समानता और स्वतंत्रता से जीवन जीने के लिये आरक्षण की जरुरत पड़ी और इसकी मदद से लोग अपनी तरह से जीने लगे थे.

आरक्षण का उद्देश्य (Aim Of Reservation System)

आरक्षण का मुख्य उद्देश्य जब किसी भी व्यक्ति को उसके सभी अधिकार न मिले तो वह अपने लिये आरक्षण का उपयोग करके अपने सभी अधिकारों को प सकता है, आरक्षण का मुख्य उद्देश्य ही सभी को सभी क्षेत्र में समान अधिकार दिलाना है ताकि किसी के भी अधिकारों का हनन न होने पाये और कोई भी अपने अधिकारों का गलत उपयोग न करके पाये.

आरक्षण के लाभ (Benefit Of Reservation System)

  1. आरक्षण की वजह से सभी को सामान अधिकार मिलने लगे.
  2. लोगो में जाति-पाति और उंच नीच का भेदभाव न हो.
  3. सभी अपने अनुसार अपना जीवन व्यतीत कर सके.

आरक्षण से हानि (Loss of Reservation System)

  1. लोग आरक्षण का गलत फायदा भी उठाते है जिसकी वजह से जरुरतमंद लोग उसका लाभ नही पाते है.
  2. लोग आजकल मेहनत नही करते है क्योकि आरक्षण की वजह से उन्हें सबकुछ आसानी से मिल जाता है.

आरक्षण के प्रकार (Type Of Reservation System)

जब से आरक्षण लागु किया गया है कई तरह से देखने को मिला है जो की निम्न है.

  1. जाति के आधार पर
  2. महिलाओ के लिये
  3. शिक्षा के लिये
  4. धर्म के आधार पर
  5. आरक्षण के अन्य प्रकार

1 – जाति के आधार पर –

हर व्यक्ति अपने जन्म से किसी न किसी जाति, धर्म में बटा होता है जाति के आधार पर आरक्षण की जरुरत दलितों के पड़ी थी क्योकि उन्हें समाज में बहुत ही नीचा दर्जा दिया गया था जिससे उबरने के लिये और उन्हें भी समाज के अनुसार जीवन व्यतीत करने के लिये आरक्षण का सहारा दिया गया.

प्राचीन काल में समाज –

प्राचीन काल में जाति के अनुसार बहुत ही भेदभाव था जिसका उल्लेख वेदों में भी किया गया है, प्राचीन समय में चतुर्वर्ग प्रणाली हुआ करती थी जिसके अनुसार समाज चार भागो में विभक्त था जो कुछ इस तरह था –

पुरोहित, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र – इनमे से पहले तीन वर्ग तो समाज में समानता से अपना जीवन बिताते थे मतलब भेदभाव इनमे भी था पर उतना ज्यादा नही जितना की शूद्र वर्ग के लोगो से किया जाता था.

शूद्र वर्ग के लोगो के लिये न मिलने वाले अधिकार थे जैसे की उच्च शिक्षा प्राप्त न करना, जमीन न खरीदना, व्यापार न करना और इन्हें सिर्फ इस तरह के ही काम मिलते थे जैसे की खेतो की सफाई करना, जानवरों की देखभाल करना और उनकी सफाई करना, मैले कपड़े धोना आदि.

वर्तमान में समाज –

प्राचीन काल से चली आ रही समस्या को देखते हुए दलितों के लिये सविधान में कानून बनाये गये, और फिर उन्हें भी धीरे धीरे एक सामान अधिकार प्रदान किये गये. लोगो के विचारो से उंच नीच की भावना को दूर करने की कोशिश की गयी.

जिस तरह से जिस वर्ग की जनसँख्या थी उस हिसाब से सभी वर्गो को आरक्षण दिया गया और उसमे समय समय पर बदलाव भी किये गये. और ये आरक्षण प्रतिशत कुछ इस तरह है.

कानून –

भारतीय संविधान में आरक्षण के लिये अनुच्छेद बनाये गये जिसमे से अनुच्छेद 14 , अनुच्छेद 15 आरक्षण के लिये लागू होते है.

महिलाओ के लिये आरक्षण –

महिलाओ को आरक्षण की जरुरत इसलिए पड़ी क्योकि उन्हें हमेशा ही पुराने रीति-रिवाजों की वजह से पर्दा प्रथा में रहना पड़ता था, और उन्हें खुलकर अपनी जिन्दगी जीने की आज़ादी नही प्राप्त थी न ही उन्हें उच्च शिक्षा का अधिकार था और हर जगह पर उनके लिये एक बंधन हुआ होता था जिसे हमेशा उन्हें मानना पड़ता था और उसी की वजह से उनका अत्यधिक शोषण किया जाता था.

प्राचीन काल में महिलाओ कि स्थिति –

प्राचीन काल में पर्दा प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह, महिलाओ को मारना, उनके साथ बुरा व्यव्हार करना, दहेज़ के चलते उन्हें जला देना और भी कई कारण थे जिसके वजह से स्त्रियों को लिये भी आरक्षण की मांग की गयी.

वर्तमान में महिलाओ की स्थिति –

महिलाओ के लिये संविधान में 108वॉ संसोधन किया गया जो की वर्ष 2014 में किया गया, जिसमे कहा गया की महिलाओ को 33% तक आरक्षण दिया जायेगा उसके बाद महिलाओ के लिये कई सरे कानून बने और इसके बाद प्रधानमत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने बेटी बचाओ, बेटी पढाओ नाम का अभियान चलाया.

जिसके बाद महिलाओ को और ज्यादा प्रोत्साहन मिला है, इसके बाद 05 मार्च 2016 को एक और विधेयक पारित हुआ जिसमे महिलाओ के लिये विधान सभाओ व संसद में भी एक तिहाई सीट अरक्षित की गयी.

कानून –

भारतीय संविधान में आरक्षण के लिये अनुच्छेद बनाये गये जिसमे से अनुच्छेद 14 , अनुच्छेद 15 आरक्षण के लिये लागू होते है.

शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण –

अगर बात करे शिक्षा की तो यह आज का और आने वाले भविष्य का के लिये बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिस तरह का भेदभाव प्राचीन काल में शिक्षा पर किया जाता था उसे समाप्त करने के लिये शिक्षा में भी आरक्षण की व्यवस्था की गयी.

प्राचीन काल में शिक्षा –

प्राचीन काल में शिक्षा के लिये सभी को सामान अधिकार नही थे हर जगह पर धर्म, जाति, लिंग के अनुसार शिक्षा में भेदभाव था जिसमें सबसे ज्यादा महिलाये और शूद्र वर्ग के लोग परेशान थे.

वर्तमान में शिक्षा –

अगर कोई भी देश या शहर या गाँव ही क्यों न हो अगर वो चाहता है की वो उन्नति करे तो उसमे सबसे पहले शिक्षित लोगो का होना जरुरी है और शायद इसलिए भारत के विकास के लिये शिक्षा को बढ़ावा दिया गया, जिसमे सभी जाति और वर्ग को समान शिक्षा मिले इसके लिये शिक्षा में भी आरक्षण लागु किया गया.

कानून –

भारतीय संविधान में शिक्षा आरक्षण के लिये अनुच्छेद बनाये गये जिसमे से अनुच्छेद 14 , अनुच्छेद 15 और 21(क) आरक्षण के लिये लागू होते है.

धार्मिक आरक्षण –

भारतवर्ष में अनेक धर्मो के लोग निवास करते है, और हमेशा से ही कोई न कोई ऐसा होता है जो की अपने धर्म को बढाने के लिये आरक्षण की मांग करता है आप बताये क्या ऐसा संभव है मेरे अनुसार तो बिलकुल नही पर फिर भी कभी कभी ऐसे मुद्दों पर भी आरक्षण देना पड़ता है.

प्राचीन काल में धर्म –

प्राचीन काल में तो ऐसा था की उछ कुल के लोगो को ही धर्म के मानने का अधिकार था, शूद्र वर्ग के लोगो के लिये तो उनका मंदिर भी जाना मना था और साथ ही अन्य स्ध्रम को मानने वाले लोग जैसे की इस्लाम, जैन, सिख, आदि लोगो के धर्म को बचाने के लिये आरक्षण बहुत ही जरुरी था.

वर्तमान में धर्म –

वर्तमान तो सभी धर्मो और उनकी जरूरतों और भी कुछ चीजों को ध्यान में रखकर ऐसे कानून बनाये गये है जिसकी वजह से सभी धर्म की रखा हो सके और इसके लिये संविधान में अलग से कानून भी बनाया गया.

सिर्फ तीन ऐसे राज्य है जहा पर कुछ समय पहले मुस्लिम धर्म के लोगो के लिये एक निश्चित प्रतिशत में आरक्षण घोषित किया गया.

कानून –

भारतीय संविधान में धर्म आरक्षण के लिये अनुच्छेद बनाये गये जिसमे से अनुच्छेद 14 , अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 लागू होते है.

आरक्षण के अन्य प्रकार –

आरक्षण के अन्य प्रकार में शामिल है –

  • नौकरी में आरक्षण विकलांगता को देखकर
  • सरकारी अधिकारियो की मृत्यु होने पर उनके परिवार को आरक्षण.
  • खिलाडियों को नौकरी में आरक्षण.
  • सशत्र बलों में काम कर चुके व्यक्तियों को.
  • शहीद हुए जवानों पर आश्रित परिवार को.
  • अंतर-जातीय विवाह से जन्मे बच्चो को आरक्षण.
  • स्वदेश लौट कर आने वालो को.
  • पूजा स्थलों में आरक्षण.
  • वरिष्ठ नागरिको को बस के किराये में आदि.

कानून –

भारतीय संविधान में इस आरक्षण के लिये अनुच्छेद बनाये गये जिसमे से अनुच्छेद 14 , अनुच्छेद 15, अनुच्छेद 16, अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 335 लागू होते है.

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Rajaneesh Maurya

रजनीश मौर्या blog4help के डिजाईन, डेवेलपमेंट और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के विशेषज्ञ है, ये इस साईट के एडमिन भी है| इन्हें वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ करना और आर्टिकल लिखना बहुत ही पसंद है|

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